मर्म चिकित्सा एवं सूक्षम योगिक
शरीर में उर्जा को संतुलित करने के लिये
मर्म चिकित्सा क्या है?
मर्म विज्ञान, आयुर्वेदिक ज्ञान के विशाल भंडार में एक असाधारण रत्न है, जो शरीर में विशेष महत्वपूर्ण स्थानों (मर्म) के विज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है। योग व् अन्य प्राचीन भारतीय परम्पराओं में मर्म विज्ञान का उपयोग ,एक चिकित्सीय तकनीक के रूप में किया गया है। मानव शरीर में मूख्य रूप से १०८ मर्म स्थान तथा ७०० उर्जा बिन्दुओं पर प्राण उर्जा के बाधित हो जाने से विभिन्न प्रकार के असाध्य रोग उत्पन्न हो जाते हैं, जिनका उपचार करने के लिए मर्म चिकत्सा व् सूक्ष्म योगिक क्रिया एकमात्र विकल्प है। सभी १०८ मर्म स्थानों पर विशेष दबाव डालकर अथवा मालिश के माध्यम से विकृत व् बाधित प्राण को संचालित करके तथा ७०० उर्जा बिन्दुओं को सूक्षम योगिक क्रियाओं जैसे सर्वोतान, स्कन्ध- चालन,पग- चालन, नाभि- चालन, जानू- प्रसार, बाल – मचलन, नाड़ी- संचालन, उत्क्षेपण आदि के अभ्यास से उर्जा को संतुलित करके शरीर को रोगमुक्त किया जाता है।
मर्म चिकित्सा के प्रकार
मर्म अभ्यंग
औषधीय तेलों से मर्म बिंदुओं पर की जाने वाली एक विशेष मालिश, जो मांसपेशियों को आराम देती है और ऊर्जा को संतुलित करती है।
मर्म लेप
विशिष्ट मर्म बिंदुओं पर औषधीय जड़ी-बूटियों का लेप लगाना, जो सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है।
मर्म वेधन
बिना सुई के एक्यूप्रेशर की तरह, इन ऊर्जा बिंदुओं को उत्तेजित करके शरीर के विभिन्न अंगों को ठीक करना।
मर्म चिकित्सा के लाभ
- दर्द और सूजन से तत्काल राहत।
- तंत्रिका तंत्र को शांत करता है।
- शरीर को ऊर्जावान बनाता है।
- रक्त परिसंचरण में सुधार करता है।
- मानसिक और भावनात्मक संतुलन लाता है।
- शरीर के अंगों को पुनर्जीवित करता है।
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